Thursday, December 8, 2011
Thursday, November 17, 2011
"महगाई"
जी हाँ मंहगाई आज के समय में सागर के लहरों की भाँती उफान मार रही है आज हर वस्तुवों के मूल्यों में वृद्धि आ चुकी है जो वास्तु कभी दस रुपये की हुआ करती थी आज वह चालीश रुपये की है आज आंते का मूल्य अस्सी रपये में पञ्च किलो है जो की पहले पचास रुपये में हुआ करता था इसी तरह चीनी , चावल , तेल , इत्यादि वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि हो गयी है और दूसरी तरफ गैस और पेट्रोल के दाम तो आसमान छू रहे है इस मंहगाई ने तो बड़े बड़े महाजनों की कामद तोड़ दी तब आम गरीबो का क्या होगा ?
जो एक दिन में १५० रुपये कमाता है जिससे वह किसी तरफ से दो वक्त की दाल रोटी चलता है फिर भी वह अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा भविष्य देने का सपना देखता है जो की संभव नहीं होसकता क्योंकि आज तो वस्तुओं के साथ साथ विद्यालयों के शुल्कों में भी बढ़ोतरी हो गयी जिससे उनका यह सपना सपना ही बनकर रह जता है फिर भी हमारी सरकार इसके लिए कोई उपाय सोचने में असमर्थ है
जो एक दिन में १५० रुपये कमाता है जिससे वह किसी तरफ से दो वक्त की दाल रोटी चलता है फिर भी वह अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा भविष्य देने का सपना देखता है जो की संभव नहीं होसकता क्योंकि आज तो वस्तुओं के साथ साथ विद्यालयों के शुल्कों में भी बढ़ोतरी हो गयी जिससे उनका यह सपना सपना ही बनकर रह जता है फिर भी हमारी सरकार इसके लिए कोई उपाय सोचने में असमर्थ है
Thursday, November 10, 2011
"दिल"
मेरा दिल बेकरार है
आज किसी का इन्तजार है
आज फिर से आने वाली बाहार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है
आज बागो में फिर से कोयल गीत सुनाने लगी है
आज फिर से वही सुन्गान्धित
हवा बहने लगी है
सागर की लहरे फिर से
किनारों को छूने के लिए मचंलने लगी है
आज फिर उसी बारिश का इन्तजार है
आज मिलने वाली खुशियाँ आपार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है
आज किसी का इन्तजार है
आज फिर से आने वाली बाहार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है
आज बागो में फिर से कोयल गीत सुनाने लगी है
आज फिर से वही सुन्गान्धित
हवा बहने लगी है
सागर की लहरे फिर से
किनारों को छूने के लिए मचंलने लगी है
आज फिर उसी बारिश का इन्तजार है
आज मिलने वाली खुशियाँ आपार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है
Monday, November 7, 2011
"कशिश "
जब याद आती है वो
मेरे दिलो दिमाक में छा जाती है
मै पाता हू उसे
अपने पास
मै महसूस कर ता हू उसे
और उन हवाओ को भी
जो छूकर कर आती है उसे
मै पाकर भी पा नहीं सकता सकता उसे
मै देख कर भी देख नहीं सकता उसे
फिर एक अजीब सी टीस
उठती है मेरे हृदय में
फिर मै सोचता हू
क्यों आती है उसकी यादे
मै भुलाना चाहता उसको और उसकी यादों को
पर भूल नहीं पाता हू
एक अजीब सी कशिश है उसमे
जो मुझे उसके तरफ खिचती है
मेरे दिलो दिमाक में छा जाती है
मै पाता हू उसे
अपने पास
मै महसूस कर ता हू उसे
और उन हवाओ को भी
जो छूकर कर आती है उसे
मै पाकर भी पा नहीं सकता सकता उसे
मै देख कर भी देख नहीं सकता उसे
फिर एक अजीब सी टीस
उठती है मेरे हृदय में
फिर मै सोचता हू
क्यों आती है उसकी यादे
मै भुलाना चाहता उसको और उसकी यादों को
पर भूल नहीं पाता हू
एक अजीब सी कशिश है उसमे
जो मुझे उसके तरफ खिचती है
Thursday, September 8, 2011
क्या बिना तेरे भी.....................
क्या बिना तेरे भी
कोई वजूद है मेरा
क्या तुम भी
करती हो मुझे याद
क्या तुम भी
महसूस करती हो
मेरे आने जाने वाली सांसो को
क्या तुम भी महसूस करती हो
उन हवाओं को
जो स्पर्श करके जाती है मुझे
मै हर पल
महसूस करता हु तुम्हे
अपनी आने जाने वाली सांसो में
बहती हवाओं में
मै महसूस करता हू
तुम्हारी मुस्कराहट
खिलते हुए फूलो में
क्या तुम भी
महसूस करती हो मुझे
क्या तुम भी
महसूस करती हो मुझे
Thursday, August 18, 2011
"उमंग"
एक दिन
मै बैठा था और कुछ सोच रह था
तभी मेरे जहाँ में एक ख्याल आया
क्या है ये उमंग
क्यों किसी को कुछ अच्छा करते देख
मेरा हृदय करता है की मई उनका साथ दू
क्या यही है उमंग
जी हमें प्रेरित करता है
किसी कार्य को करने के लिए
फिर मैंने सोचा की
मै क्यों बैठा हु युही
मुझे भी करना चाहिए देश के लिए कुछ भी ..............
मै बैठा था और कुछ सोच रह था
तभी मेरे जहाँ में एक ख्याल आया
क्या है ये उमंग
क्यों किसी को कुछ अच्छा करते देख
मेरा हृदय करता है की मई उनका साथ दू
क्या यही है उमंग
जी हमें प्रेरित करता है
किसी कार्य को करने के लिए
फिर मैंने सोचा की
मै क्यों बैठा हु युही
मुझे भी करना चाहिए देश के लिए कुछ भी ..............
Wednesday, July 6, 2011
"जिंदगी"
ऐ जिंदगी
मई चलता रहा अबतक अकेले
चलता ही जाऊंगा हमेशा अकेले
फिरभी तुझसे एक गुजारिश है की
कुछ पल तो मेरे साथ चला कर
अब तक मै सब सहता रहा है
लाख कांटे हो राह में मै चलता रहा
मिटा के क़ज़ा के फासले को
अब तक मै जीता रहा
ऐ जिंदगी तुझसे एक गुजारिश है
कुछ पल मेरे साथ तू भी तो जिया कर
मई चलता रहा अबतक अकेले
चलता ही जाऊंगा हमेशा अकेले
फिरभी तुझसे एक गुजारिश है की
कुछ पल तो मेरे साथ चला कर
अब तक मै सब सहता रहा है
लाख कांटे हो राह में मै चलता रहा
मिटा के क़ज़ा के फासले को
अब तक मै जीता रहा
ऐ जिंदगी तुझसे एक गुजारिश है
कुछ पल मेरे साथ तू भी तो जिया कर
Tuesday, June 14, 2011
सब बिकते है
इस दुनिया में सब बिकते है
मानव बिकते
वोट बिकते
नेता बिकते
अफसर बिकते
इस दुनिया में सब बिकते
बच्चे बिकते
बूढ़े बिकते
बच्चों का बचपन भी भी बिकता
मानव की खुशिया भी बिकती
इस दुनिया में लोगो के इज्जत भी बिकते
देखो इस दुनिया में सबकुछ बिकते
मानव बिकते
वोट बिकते
नेता बिकते
अफसर बिकते
इस दुनिया में सब बिकते
बच्चे बिकते
बूढ़े बिकते
बच्चों का बचपन भी भी बिकता
मानव की खुशिया भी बिकती
इस दुनिया में लोगो के इज्जत भी बिकते
देखो इस दुनिया में सबकुछ बिकते
Saturday, June 11, 2011
किनारा
मै चाहता हू उससे बात करना
मगर उससे बात नहीं कर सकता
वह मेरे सामने है
मगर मै उसे देख नहीं सकता
वह मुझमे है
मगर मै उसे पा नहीं सकता
वह आती है मेरे ख्वाबों में
पर मै उसे बांध नहीं सकता
हम सागर के दो किनारे है
चाहते है एक दुसरे से मिलना
पर मिल नहीं सकते ...
मगर उससे बात नहीं कर सकता
वह मेरे सामने है
मगर मै उसे देख नहीं सकता
वह मुझमे है
मगर मै उसे पा नहीं सकता
वह आती है मेरे ख्वाबों में
पर मै उसे बांध नहीं सकता
हम सागर के दो किनारे है
चाहते है एक दुसरे से मिलना
पर मिल नहीं सकते ...
Saturday, June 4, 2011
पर्यावरण
पर्यावरण अर्थात जो हमारे चारो तरफ मौजूद है ा वह सब पर्यावरण के अन्तर्गत आता है स्वस्थ समाज के लीये स्वस्थ पर्यावरण का होना जरूरी है पर्यावरण समाज का एक अभिन्न अंग है बीना स्वस्थ पर्यावरण के स्वस्थ समाज की कल्पना भी नही की जा सकती एक स्वस्थ समाज के लीये स्वस्थ पर्यावरण का होना आवष्यक है
परन्तु आज के समय मे पर्यावरण स्वस्थ होने के बजाय अस्वस्थ होता जा रहा है इसके अस्वस्थ होने का जिम्मेदार आप और हम है हमी गंदगी फैलाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है इसको बनाने हेतु हमस ब को मिलकर पहल करनी पडेगी हम सबको पेड लगाने चाहिये
गंदगी नही फैलानी चाहिये पालिथीन का प्रयोग नही करना चाहिये ऐसी कुछ सावधानिया बरत कर हम पर्यावरण को दूसित होने से बचा सकते है ।
परन्तु आज के समय मे पर्यावरण स्वस्थ होने के बजाय अस्वस्थ होता जा रहा है इसके अस्वस्थ होने का जिम्मेदार आप और हम है हमी गंदगी फैलाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है इसको बनाने हेतु हमस ब को मिलकर पहल करनी पडेगी हम सबको पेड लगाने चाहिये
गंदगी नही फैलानी चाहिये पालिथीन का प्रयोग नही करना चाहिये ऐसी कुछ सावधानिया बरत कर हम पर्यावरण को दूसित होने से बचा सकते है ।
Friday, June 3, 2011
"अहसास"
एक शाम
मै सागर किनारे बैठा था
सागर में आने जाने वाली लहरों को देख रहा था
तभी एक लहर सागर से उठी
उस लहर को देख कर
मेरे जहाँ में एक सवाल आया
क्या है तन्हाई
क्या यही है की
सागर से उठने वाली लहरें
किनारे तक नहीं पंहुच पाती
और वो तनहा रह जाती है
तब मुझे "अहसास" HUAA की
शायद यही है तन्हाई
मै सागर किनारे बैठा था
सागर में आने जाने वाली लहरों को देख रहा था
तभी एक लहर सागर से उठी
उस लहर को देख कर
मेरे जहाँ में एक सवाल आया
क्या है तन्हाई
क्या यही है की
सागर से उठने वाली लहरें
किनारे तक नहीं पंहुच पाती
और वो तनहा रह जाती है
तब मुझे "अहसास" HUAA की
शायद यही है तन्हाई
Monday, May 23, 2011
याद
जब याद उनकी आती है
एक दर्द दिल मे छोड जाती है
वेा बीते हुये कल कि तरह
गुजर गयी है जीवनसे मेरे
न जाने क्यों उसी को ढूढती है निगाहें मेरी
मै भूलना चाहता हूॅ उसे
पर यादे भूलने नही देती
जब भी उसकी याद आती है
मेरे दिल मे अजीब सा अहसास छोड जाती है
क्यों रखता हूॅ मै उसके लौट आने का आस
ज्ब वो दूर है जीवन से मेरे
क्यों नही जाती यादों से दूर मेरे
क्यों उनकी तस्वीर आती है सामने मेरे
आखिर क्यों उसकी याद आती है
एक दर्द दि लमे छोड जाती है...
एक दर्द दिल मे छोड जाती है
वेा बीते हुये कल कि तरह
गुजर गयी है जीवनसे मेरे
न जाने क्यों उसी को ढूढती है निगाहें मेरी
मै भूलना चाहता हूॅ उसे
पर यादे भूलने नही देती
जब भी उसकी याद आती है
मेरे दिल मे अजीब सा अहसास छोड जाती है
क्यों रखता हूॅ मै उसके लौट आने का आस
ज्ब वो दूर है जीवन से मेरे
क्यों नही जाती यादों से दूर मेरे
क्यों उनकी तस्वीर आती है सामने मेरे
आखिर क्यों उसकी याद आती है
एक दर्द दि लमे छोड जाती है...
Thursday, May 19, 2011
तेरी याद
मैं जब कभी किसी बाग मे जाता हूॅ
कोयल के गीतों को सुनता हूॅ
बाग मे खिले हुये फूलो को देखता हूॅ
तब तेरी याद आती हैं
दिल मे एक अजीब सा अहसास छोड जाती है
जब मै षाम को सागर के किनारे पर जाता हूॅ
ष्षाम का वह सुरम्ब द्रष्य देखता हूॅ
तब तेरी याद आती है
मैं जब कभी अपने आप को अकेला महसूस करता हूॅ
तब तेरी याद आती है
सच पूछो तो तेरी ये याद
मेरे दिल को बडा सुकुन पहुॅचाती है
कोयल के गीतों को सुनता हूॅ
बाग मे खिले हुये फूलो को देखता हूॅ
तब तेरी याद आती हैं
दिल मे एक अजीब सा अहसास छोड जाती है
जब मै षाम को सागर के किनारे पर जाता हूॅ
ष्षाम का वह सुरम्ब द्रष्य देखता हूॅ
तब तेरी याद आती है
मैं जब कभी अपने आप को अकेला महसूस करता हूॅ
तब तेरी याद आती है
सच पूछो तो तेरी ये याद
मेरे दिल को बडा सुकुन पहुॅचाती है
Thursday, March 10, 2011
खुशियाँ हमको लूट गयीं...
खुशियाँ हमको लूट गयीं
किया था वादा साथ चलने का
सपने दिखा कर वो सपने तोड़ गयी
खुशिया हमको लूट गयी
जब हुआ सामना रहो में कठिनाइयों से
जब चुभने लगे राहों में काटें
तब वो हमको छोड़ गयीं
खुशियाँ हमको लूट गयीं
हम दोनों ने तो किया था वादा साथ चलने का
मै तो अपने वादे पर अब भी कायम हूँ
वो देख कर मुसीबतों को राहों में
हमको छोड़ गयीं, खुशियाँ हमको लूट गयीं...
Thursday, March 3, 2011
बस अब नहीं...
भृष्टाचार आज के समय में एक बड़ी समस्या बन कर रह गया है ! आखिर क्योँ नहीं ख़त्म हो रहा भृष्टाचार क्योकि आप और हम खुद नहीं चाहते की भृष्टाचार ख़त्म हो, बस बहुत हुआ अब पहल करनी पड़ेगी ! अब मै शांत नहीं रह सकता आखिर क्यूँ सर्कार बड़े-बड़े दावे करती है ? क्यूँ नहीं उठती कोई ठोस कदम, सर्कार के द्वरा उठाये गए कदम आप भी जानते है और मै भी ! क्यों नहीं लती सर्कार कला धन वापस ? कोई नहीं करती कोई ठोस कार्यवाई ? अब हामी लोगों को कु६ करना पड़ेगा, भारत लुट रहा है और हम देख रहे है ! हम भारत को लुटते नहीं देख सकते, भारत की जनता को एकत्र होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, लेकिन यहाँ तो आवाज उठाने की बात दूर रही, लोग इसके बारे में सोंचते तक नहीं ! वे कहते है भला हम कैसे लड़ सकते है, वो ये भूल जाते है की हमारे देश के शहीद अगर ऐसा ही सोंचते तो आज तक हम आजाद ही न हुए होते.........................
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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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हम तो यह सोंच कर हैरान है की आख़िरकार वरिष्ठ ब्लॉगर कहा है ! उनका कुछ अता पता नहीं है ! क्या वरिष्ठ ब्लोग्गारो के पास नहीं बचा है कोई जवाब ! ...
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भृष्टाचार आज के समय में एक बड़ी समस्या बन कर रह गया है ! आखिर क्योँ नहीं ख़त्म हो रहा भृष्टाचार क्योकि आप और हम खुद नहीं चाहते की भृष्टा...
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जी हाँ मंहगाई आज के समय में सागर के लहरों की भाँती उफान मार रही है आज हर वस्तुवों के मूल्यों में वृद्धि आ चुकी है जो वास्तु कभी दस रुपये की ...



