मै चाहता हू उससे बात करना
मगर उससे बात नहीं कर सकता
वह मेरे सामने है
मगर मै उसे देख नहीं सकता
वह मुझमे है
मगर मै उसे पा नहीं सकता
वह आती है मेरे ख्वाबों में
पर मै उसे बांध नहीं सकता
हम सागर के दो किनारे है
चाहते है एक दुसरे से मिलना
पर मिल नहीं सकते ...
Saturday, June 11, 2011
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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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