इस दुनिया में सब बिकते है
मानव बिकते
वोट बिकते
नेता बिकते
अफसर बिकते
इस दुनिया में सब बिकते
बच्चे बिकते
बूढ़े बिकते
बच्चों का बचपन भी भी बिकता
मानव की खुशिया भी बिकती
इस दुनिया में लोगो के इज्जत भी बिकते
देखो इस दुनिया में सबकुछ बिकते
Tuesday, June 14, 2011
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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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भृष्टाचार आज के समय में एक बड़ी समस्या बन कर रह गया है ! आखिर क्योँ नहीं ख़त्म हो रहा भृष्टाचार क्योकि आप और हम खुद नहीं चाहते की भृष्टा...
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ये इश्क ये मोहब्बत प्यार उल्फत ना जाने क्या क्या सिखा देती है वो जब भी मिलती है मुझे अक्सर रुला देती है जब भी सोचता हू चलू अब ...
इन्सानीयत भी
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