Wednesday, June 2, 2010
वरिष्ठ ब्लोग्गर हुए गायब {गुटबाजी का सबब}
हम तो यह सोंच कर हैरान है की आख़िरकार वरिष्ठ ब्लॉगर कहा है ! उनका कुछ अता पता नहीं है ! क्या वरिष्ठ ब्लोग्गारो के पास नहीं बचा है कोई जवाब ! वैसे भी जब ऊंट पहाड़ के नीचे आता है तब उसे अपनी असलियत मालूम पड़ती है ! कुछ व्यक्ति बेनामी टिप्पड़ी लिखते है अगर उनमे साहस है तो अपने नाम से करे टिप्पड़ी फिर मजा आएगा ! आ जाएँ मैदान में तभी तो मालूम पड़ेगा की कौन कितने पानी में है ! बिनामी लोगो के बारे में कहना चाहूँगा की उनके माता पिता ने कुछ न कुछ तो उनका नाम रखा होगा ! शायद यह नसीहत उनको वरिष्ठ ब्लोग्गारो से विराशत में मिली है !
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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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जी हाँ मंहगाई आज के समय में सागर के लहरों की भाँती उफान मार रही है आज हर वस्तुवों के मूल्यों में वृद्धि आ चुकी है जो वास्तु कभी दस रुपये की ...
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