Thursday, November 10, 2011

"दिल"

मेरा दिल बेकरार है
आज किसी का इन्तजार है
आज फिर से आने वाली बाहार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है
आज बागो में फिर से कोयल गीत सुनाने लगी है
आज फिर से वही सुन्गान्धित
हवा बहने लगी है
सागर की लहरे फिर से
किनारों को छूने के लिए  मचंलने लगी है
आज फिर उसी बारिश का इन्तजार है
आज मिलने वाली खुशियाँ आपार है
इसलिए मेरा दिल बेकरार है 

















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