Friday, June 3, 2011

"अहसास"

एक शाम
मै सागर किनारे बैठा था
सागर में आने जाने वाली लहरों को देख रहा था
तभी एक लहर सागर से उठी
उस लहर को देख कर
मेरे जहाँ में एक सवाल आया
क्या है तन्हाई
क्या यही है की
सागर से उठने वाली लहरें
किनारे तक नहीं पंहुच पाती
और वो तनहा रह जाती है
तब मुझे "अहसास" HUAA की
शायद यही है तन्हाई

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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....

क्यों धीरे धीरे खुद को   खो रहा हूं मैं  जीने निकले थे  ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को  धीरे धीरे खो रहा हूं मैं  यूं तो कमी ...