Monday, November 7, 2011

"कशिश "

जब याद  आती है वो
मेरे दिलो  दिमाक  में छा जाती है
मै  पाता हू उसे
अपने पास
मै महसूस कर ता हू उसे
और उन हवाओ को भी
जो छूकर कर आती है उसे
मै पाकर भी पा नहीं सकता  सकता उसे
मै देख कर भी देख नहीं सकता उसे
फिर एक अजीब सी टीस
उठती है मेरे हृदय में
फिर मै सोचता  हू
 क्यों  आती है उसकी  यादे
मै भुलाना चाहता उसको और उसकी यादों को
पर भूल नहीं पाता   हू
एक  अजीब सी कशिश है उसमे 
जो मुझे उसके  तरफ खिचती है

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