Friday, January 16, 2015

क्या है अब....

क्या है अब
 एक समय था
 जब तुम थी
 तुम्हारा साथ था
 कुछ ख्वाब थे
 कुछ जज्बात थे
 जीने का अहसास था
 खुशियोँ की बरषात थी
आज भी एक समय है
 जब हम साथ है
 पर ये समय
 अब वो समय नही रहा
 वो अहसास नही रहे
वो जज्बात नही रहे
अब खामोशिया भी शोर करने लगी है
 तन्हाई मुझसे अब लडने लगी है
चाँद तो आज भी आता है
 छत पर मेरे ना जाने फिर चाँदनी क्योँ बदलने लगी है
 हवाये भी मुझसे यह कहने लगी है
 शायद अब तुम, तुम नही रहे
 ना अब वो दिन रहे
तब तक फिर एक हवा का झोका आया
, मैने पूछा क्या है अब,
 तब उसने कहा
अब वो समय नही रहा,
 बूढा हो गया, लंगडाने लगा है
 अब आँखे कमजोर होने लगी है
उसकी, तब अहसास हुआ की
 सब होते हुये भी वो सब नही रहा अब....

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