मेरा दिल बेकरार है
आज फिर किसी का इन्तजार है
मचल रही धडकने
कुछ ऐसी इन्तजार मे
उनके उठती है लहरे सागर मे
जैसे वो बाग और चिडियोँ का चहकना,
फिर कलियोँ का वो मुस्कराना
हमे लगने लगा हर मौसम फिर से सुहाना
, फिर से आने वाली
खुशियोँ कि वही बहार है
, मेरा दिल बेकरार है
मुझे फिर से तेरा इन्तजार है....
आज फिर किसी का इन्तजार है
मचल रही धडकने
कुछ ऐसी इन्तजार मे
उनके उठती है लहरे सागर मे
जैसे वो बाग और चिडियोँ का चहकना,
फिर कलियोँ का वो मुस्कराना
हमे लगने लगा हर मौसम फिर से सुहाना
, फिर से आने वाली
खुशियोँ कि वही बहार है
, मेरा दिल बेकरार है
मुझे फिर से तेरा इन्तजार है....
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