Monday, January 19, 2015

दिन बीत जाता है
 तुम्हारी यादोँ मे
 टूटते बिखरते ख्वाबोँ को सजाने मेँ
 अक्सर पाता हू भीड मे भी खुद को तन्हा
 जब चली गयी हो तुम
 तो अपनी यादे क्योँ छोड गयी हो पास मेरे
 ये ना तो जीने देती है और ना ही मरने
बस बीतता जाता है
 मेरा दिन उन्ही पुराने अहसासोँ मेँ
 ना जाने वो कौनसी अनजानी सी डोर
 जो आज भी मुझे तेरे करीब लाके खडा कर देती है
 वही चाँद वही चाँदनी
 वो साथ बिताये सुहाने पल को फिर से महसूस करने लगता हू
 फिर अचानक से ख्याल आया
 ये तो महज यादे है
 फिर एक टीस उठी दिल मे मेरे
 और एक ख्वाहिश जगी की कही मिल जाये वो
 मुझे फिर से दोबारा
 तो उससे पूछलू की क्या कसूर था मेरा... ?

Friday, January 16, 2015

क्या है अब....

क्या है अब
 एक समय था
 जब तुम थी
 तुम्हारा साथ था
 कुछ ख्वाब थे
 कुछ जज्बात थे
 जीने का अहसास था
 खुशियोँ की बरषात थी
आज भी एक समय है
 जब हम साथ है
 पर ये समय
 अब वो समय नही रहा
 वो अहसास नही रहे
वो जज्बात नही रहे
अब खामोशिया भी शोर करने लगी है
 तन्हाई मुझसे अब लडने लगी है
चाँद तो आज भी आता है
 छत पर मेरे ना जाने फिर चाँदनी क्योँ बदलने लगी है
 हवाये भी मुझसे यह कहने लगी है
 शायद अब तुम, तुम नही रहे
 ना अब वो दिन रहे
तब तक फिर एक हवा का झोका आया
, मैने पूछा क्या है अब,
 तब उसने कहा
अब वो समय नही रहा,
 बूढा हो गया, लंगडाने लगा है
 अब आँखे कमजोर होने लगी है
उसकी, तब अहसास हुआ की
 सब होते हुये भी वो सब नही रहा अब....

क्या लिखू....

क्या लिखू
 गम की वो रात लिखू
 या खुशियोँ की बरषात लिखू
 या मैँ अपने जज्बात लिखू
या सपनो का एहसास लिखू
 तन्हाई की वो शाम लिखू
या कलियोँ की मुस्कान लिखू
 की मैँ ढलता सूरज लिख दूँ
 या उजालोँ का एहसास लिखू
 तेरा निश्छल प्यार लिखू
या रातोँ की बरषात लिखू
 तुझको अपने पास लिखू या
 दूरी का एहसास लिखू क्या लिखू ?

Tuesday, January 13, 2015

अश्क आँखो मेँ फिर से दे गया कोई

अश्क आँखो मेँ
 फिर से दे गया कोई
, जख्म जो भरने लगे थे
 उन्हे फिर से हरे कर गया कोई
, खुद खामोश रह कर
मुझको मुझसे
जुदा कर गया कोई
 फिर से मुझे
 हर पल तडपने की सजा दे गया कोई,
 अश्क आँखो मेँ फिर से दे गया कोई.....

Saturday, January 10, 2015

आज फिर किसी का इन्तजार है...

मेरा दिल बेकरार है
 आज फिर किसी का इन्तजार है
 मचल रही धडकने
 कुछ ऐसी इन्तजार मे
 उनके उठती है लहरे सागर मे
 जैसे वो बाग और चिडियोँ का चहकना,
 फिर कलियोँ का वो मुस्कराना
 हमे लगने लगा हर मौसम फिर से सुहाना
, फिर से आने वाली
खुशियोँ कि वही बहार है
, मेरा दिल बेकरार है
मुझे फिर से तेरा इन्तजार है....

Thursday, January 8, 2015

फिर से उठ पडी है तेरे अहसासो की बारिष...

फिर से उठ पडी है
 तेरे अहसासो की बारिष
मुझे याद आने लगे है
कुछ पल पुराने
 वो तेरा हँसना मुस्कराना
 प्यार मेँ सबकुछ भूल जाना
 पर अब वो दिन नही रहे
 हम दूर हो गये
 एक दूसरे से
फिर भी
 हमारा प्यार बढता जा रहा है
 मैँ आज भी महसूस करता हूँ
 तुम्हे उन जगहोँ पर
जहां हम बैठा करते थे
 कभी मैँ अक्सर देख लेता हू
 तुम्हारी मुस्कराहट खिलते हुये फूलोँ मेँ
 मैँ पाता हूँ तुम्हे
 अपने आने जाने वाली हर साँसो मेँ
 मैँ महसूस कर सकता हूँ
 तुम्हे उन हवाओँ मे
 जो छू कर आती है
 तुम्हे हम दूर है
कितने फिर भी
मैँ देख लेता हूँ
तुम्हे अपने आप मेँ

फिर से उठ पडी है तेरे अहसासो की बारिष मुझे याद आने लगे है कुछ पल पुराने वो तेरा हँसना मुस्कराना प्यार मेँ सबकुछ भूल जाना पर अब वो दिन नही रहे हम दूर हो गये एक दूसरे से फिर भी हमारा प्यार बढता जा रहा है मैँ आज भी महसूस करता हूँ तुम्हे उन जगहोँ पर जहां हम बैठा करते थे कभी मैँ अक्सर देख लेता हू तुम्हारी मुस्कराहट खिलते हुये फूलोँ मेँ मैँ पाता हूँ तुम्हे अपने आने जाने वाली हर साँसो मेँ मैँ महसूस कर सकता हूँ तुम्हे उन हवाओँ मे जो छू कर आती है तुम्हे हम दूर है कितने फिर भी मैँ देख लेता हूँ तुम्हे अपने आप मेँ


धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....

क्यों धीरे धीरे खुद को   खो रहा हूं मैं  जीने निकले थे  ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को  धीरे धीरे खो रहा हूं मैं  यूं तो कमी ...