दिन बीत जाता है
तुम्हारी यादोँ मे
टूटते बिखरते ख्वाबोँ को सजाने मेँ
अक्सर पाता हू भीड मे भी खुद को तन्हा
जब चली गयी हो तुम
तो अपनी यादे क्योँ छोड गयी हो पास मेरे
ये ना तो जीने देती है और ना ही मरने
बस बीतता जाता है
मेरा दिन उन्ही पुराने अहसासोँ मेँ
ना जाने वो कौनसी अनजानी सी डोर
जो आज भी मुझे तेरे करीब लाके खडा कर देती है
वही चाँद वही चाँदनी
वो साथ बिताये सुहाने पल को फिर से महसूस करने लगता हू
फिर अचानक से ख्याल आया
ये तो महज यादे है
फिर एक टीस उठी दिल मे मेरे
और एक ख्वाहिश जगी की कही मिल जाये वो
मुझे फिर से दोबारा
तो उससे पूछलू की क्या कसूर था मेरा... ?
तुम्हारी यादोँ मे
टूटते बिखरते ख्वाबोँ को सजाने मेँ
अक्सर पाता हू भीड मे भी खुद को तन्हा
जब चली गयी हो तुम
तो अपनी यादे क्योँ छोड गयी हो पास मेरे
ये ना तो जीने देती है और ना ही मरने
बस बीतता जाता है
मेरा दिन उन्ही पुराने अहसासोँ मेँ
ना जाने वो कौनसी अनजानी सी डोर
जो आज भी मुझे तेरे करीब लाके खडा कर देती है
वही चाँद वही चाँदनी
वो साथ बिताये सुहाने पल को फिर से महसूस करने लगता हू
फिर अचानक से ख्याल आया
ये तो महज यादे है
फिर एक टीस उठी दिल मे मेरे
और एक ख्वाहिश जगी की कही मिल जाये वो
मुझे फिर से दोबारा
तो उससे पूछलू की क्या कसूर था मेरा... ?