कौन चाहता है अपनो से दूर होना
कम्ब्खत मजबूरिया दूर कर देती है
अपना शहर तो सबको अछ्छा लगता है
पर ज़िंदगी की उलझने
शहर छोड़ने पर मजबूर कर देती है
कौन चाहता है की परिवार साथ न हो
पर "प्रेम" आज तो पैसा
अपनो को अपनो से दूर कर देता है..
कम्ब्खत मजबूरिया दूर कर देती है
अपना शहर तो सबको अछ्छा लगता है
पर ज़िंदगी की उलझने
शहर छोड़ने पर मजबूर कर देती है
कौन चाहता है की परिवार साथ न हो
पर "प्रेम" आज तो पैसा
अपनो को अपनो से दूर कर देता है..
nice
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