Friday, August 11, 2017

बडे क्या हुए ख्वाब बडे हो गये..

बडे क्या हुए ख्वाब बडे हो गये
घर छूटा, वो गालिया छूटी
अपने भी पराये हो गये
आज फ़िर दवाये ले कर आया हू
कह तो दू बीमार हू पर,
 पर औफिस ना जाने के
ये सारे बहाने पुराने हो गये
सुकुन से ज़िंदगी जिये
एक जवाने हो गये
ख्वाब जो आते थे पहले
अब वो सब पुराने हो गये
कही देखा था.मैने खुद को
कुछ बिखरे हुए ख्वाबो को समेटते

खूद को गिरते और गिरकर सम्हल्ते,
अब अपनो संग समय बिताये,
जवाने हो गये
चाहता तो फ़िर से पालेता वो ज़िंदगी
पर क्या करे  प्रेम  हम सयाने हो गये !!


1 comment:

धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....

क्यों धीरे धीरे खुद को   खो रहा हूं मैं  जीने निकले थे  ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को  धीरे धीरे खो रहा हूं मैं  यूं तो कमी ...