जो आशना से लोग थे
वो अजनबी से हो गये
न जाने क्यो
ये रात और दिन भी
क्यो खफ़ा खफ़ा
से हो गये
रात आते है
ख्वाबो मे वो
फ़िर भी ज़िंदगी क्यो
भी बिखरी , बिखरी सी हो गयी
जो अशना से लोग थे
वो अजनबी से हो गये
ऐ ज़िंदगी मेरा कसूर बता
क्यो बर्बाद किया तूने मुझे
कुछ हंसी
ख्वाबो के लियेे
वक्त और ये रास्ते मुझसे
अब कह रहे
रुका है अब किसके लिये
जो था वो बित गया
फ़िर क्यो समय को ठहरा दिया खुद के
हालात क्या है देख ले
खुद से जुदा हो गये तुम खुद के लिये
वो मंजिले वो रास्ते
तुम्हे पुकारती है आज भी
क्यो रुके हो
तुम अपने यतित के लिये
आ आगे बढ और लगा गले मुझे
फ़िर से साथ चलने के लिये..
वो अजनबी से हो गये
न जाने क्यो
ये रात और दिन भी
क्यो खफ़ा खफ़ा
से हो गये
रात आते है
ख्वाबो मे वो
फ़िर भी ज़िंदगी क्यो
भी बिखरी , बिखरी सी हो गयी
जो अशना से लोग थे
वो अजनबी से हो गये
ऐ ज़िंदगी मेरा कसूर बता
क्यो बर्बाद किया तूने मुझे
कुछ हंसी
ख्वाबो के लियेे
वक्त और ये रास्ते मुझसे
अब कह रहे
रुका है अब किसके लिये
जो था वो बित गया
फ़िर क्यो समय को ठहरा दिया खुद के
हालात क्या है देख ले
खुद से जुदा हो गये तुम खुद के लिये
वो मंजिले वो रास्ते
तुम्हे पुकारती है आज भी
क्यो रुके हो
तुम अपने यतित के लिये
आ आगे बढ और लगा गले मुझे
फ़िर से साथ चलने के लिये..

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