इस दुनिया में सब बिकते है
मानव बिकते
वोट बिकते
नेता बिकते
अफसर बिकते
इस दुनिया में सब बिकते
बच्चे बिकते
बूढ़े बिकते
बच्चों का बचपन भी भी बिकता
मानव की खुशिया भी बिकती
इस दुनिया में लोगो के इज्जत भी बिकते
देखो इस दुनिया में सबकुछ बिकते
Tuesday, June 14, 2011
Saturday, June 11, 2011
किनारा
मै चाहता हू उससे बात करना
मगर उससे बात नहीं कर सकता
वह मेरे सामने है
मगर मै उसे देख नहीं सकता
वह मुझमे है
मगर मै उसे पा नहीं सकता
वह आती है मेरे ख्वाबों में
पर मै उसे बांध नहीं सकता
हम सागर के दो किनारे है
चाहते है एक दुसरे से मिलना
पर मिल नहीं सकते ...
मगर उससे बात नहीं कर सकता
वह मेरे सामने है
मगर मै उसे देख नहीं सकता
वह मुझमे है
मगर मै उसे पा नहीं सकता
वह आती है मेरे ख्वाबों में
पर मै उसे बांध नहीं सकता
हम सागर के दो किनारे है
चाहते है एक दुसरे से मिलना
पर मिल नहीं सकते ...
Saturday, June 4, 2011
पर्यावरण
पर्यावरण अर्थात जो हमारे चारो तरफ मौजूद है ा वह सब पर्यावरण के अन्तर्गत आता है स्वस्थ समाज के लीये स्वस्थ पर्यावरण का होना जरूरी है पर्यावरण समाज का एक अभिन्न अंग है बीना स्वस्थ पर्यावरण के स्वस्थ समाज की कल्पना भी नही की जा सकती एक स्वस्थ समाज के लीये स्वस्थ पर्यावरण का होना आवष्यक है
परन्तु आज के समय मे पर्यावरण स्वस्थ होने के बजाय अस्वस्थ होता जा रहा है इसके अस्वस्थ होने का जिम्मेदार आप और हम है हमी गंदगी फैलाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है इसको बनाने हेतु हमस ब को मिलकर पहल करनी पडेगी हम सबको पेड लगाने चाहिये
गंदगी नही फैलानी चाहिये पालिथीन का प्रयोग नही करना चाहिये ऐसी कुछ सावधानिया बरत कर हम पर्यावरण को दूसित होने से बचा सकते है ।
परन्तु आज के समय मे पर्यावरण स्वस्थ होने के बजाय अस्वस्थ होता जा रहा है इसके अस्वस्थ होने का जिम्मेदार आप और हम है हमी गंदगी फैलाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है इसको बनाने हेतु हमस ब को मिलकर पहल करनी पडेगी हम सबको पेड लगाने चाहिये
गंदगी नही फैलानी चाहिये पालिथीन का प्रयोग नही करना चाहिये ऐसी कुछ सावधानिया बरत कर हम पर्यावरण को दूसित होने से बचा सकते है ।
Friday, June 3, 2011
"अहसास"
एक शाम
मै सागर किनारे बैठा था
सागर में आने जाने वाली लहरों को देख रहा था
तभी एक लहर सागर से उठी
उस लहर को देख कर
मेरे जहाँ में एक सवाल आया
क्या है तन्हाई
क्या यही है की
सागर से उठने वाली लहरें
किनारे तक नहीं पंहुच पाती
और वो तनहा रह जाती है
तब मुझे "अहसास" HUAA की
शायद यही है तन्हाई
मै सागर किनारे बैठा था
सागर में आने जाने वाली लहरों को देख रहा था
तभी एक लहर सागर से उठी
उस लहर को देख कर
मेरे जहाँ में एक सवाल आया
क्या है तन्हाई
क्या यही है की
सागर से उठने वाली लहरें
किनारे तक नहीं पंहुच पाती
और वो तनहा रह जाती है
तब मुझे "अहसास" HUAA की
शायद यही है तन्हाई
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धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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भृष्टाचार आज के समय में एक बड़ी समस्या बन कर रह गया है ! आखिर क्योँ नहीं ख़त्म हो रहा भृष्टाचार क्योकि आप और हम खुद नहीं चाहते की भृष्टा...
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जी हाँ मंहगाई आज के समय में सागर के लहरों की भाँती उफान मार रही है आज हर वस्तुवों के मूल्यों में वृद्धि आ चुकी है जो वास्तु कभी दस रुपये की ...