जी हाँ मंहगाई आज के समय में सागर के लहरों की भाँती उफान मार रही है आज हर वस्तुवों के मूल्यों में वृद्धि आ चुकी है जो वास्तु कभी दस रुपये की हुआ करती थी आज वह चालीश रुपये की है आज आंते का मूल्य अस्सी रपये में पञ्च किलो है जो की पहले पचास रुपये में हुआ करता था इसी तरह चीनी , चावल , तेल , इत्यादि वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि हो गयी है और दूसरी तरफ गैस और पेट्रोल के दाम तो आसमान छू रहे है इस मंहगाई ने तो बड़े बड़े महाजनों की कामद तोड़ दी तब आम गरीबो का क्या होगा ?
जो एक दिन में १५० रुपये कमाता है जिससे वह किसी तरफ से दो वक्त की दाल रोटी चलता है फिर भी वह अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा भविष्य देने का सपना देखता है जो की संभव नहीं होसकता क्योंकि आज तो वस्तुओं के साथ साथ विद्यालयों के शुल्कों में भी बढ़ोतरी हो गयी जिससे उनका यह सपना सपना ही बनकर रह जता है फिर भी हमारी सरकार इसके लिए कोई उपाय सोचने में असमर्थ है
जो एक दिन में १५० रुपये कमाता है जिससे वह किसी तरफ से दो वक्त की दाल रोटी चलता है फिर भी वह अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर एक अच्छा भविष्य देने का सपना देखता है जो की संभव नहीं होसकता क्योंकि आज तो वस्तुओं के साथ साथ विद्यालयों के शुल्कों में भी बढ़ोतरी हो गयी जिससे उनका यह सपना सपना ही बनकर रह जता है फिर भी हमारी सरकार इसके लिए कोई उपाय सोचने में असमर्थ है


