Wednesday, June 9, 2010
नारी
नारी अर्थात जिसका कोई विरोधी न हो ! यह अर्थ वास्तव में सही है ! जिसका कोई विरोधी न हो उसे नारी कहते है ! परन्तु इस समाज में बहुत से लोग नारी के विरोधी होंगे ! देहातो और कस्बो में नारियों की स्थित वही पुरानी है ! यहाँ नारियो के आजादी में अंकुश लगाया जाता है !लोग नारी को घर के अन्दर तक ही सिमित रखना चाहते है! आज के समय में नारी का इतना शोषण किया जा रहा है ! जिसके कल्पना मात्र से मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते है ! लोगों की मानसिकता इतनी गन्दी हो चुकी है ! की वह नारी को दैहिक सुख के कुछ क्षणों के आभूषण जैसा समझते है ! लोग समझते है की नारी की सीमा घर के अन्दर तक ही है ! और पुराने रीती रिवाज और परम्पराओ के आंड में लगातार नारी का शोषण किया जा रहा है ! किसी कवी ने कहा है !की "नारी निंदा न करो, नारी नर की खान/नारी से नर होत है, ध्रुव प्रह्लाद सामान ! इस संसार में मनुष्य नारी के बिना अधूरा है ! शास्त्रों में कहा गया है की "जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहां पर देवता निवश करते है ! परन्तु फिर समाज को यह बात समझ में नहीं आ रही है ! और वे लोग लगातार नारियो का शोषण किए जा रहे है ! नारी हमारे जीवन में एक ज्योति की तरह है ! उसके बिना मानव जीवन अधूरा है !
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