
इश्क और दोस्ती मेरे गुमान है इश्क मेरी जान तो
दोस्ती मेरा ईमान है इश्क पर लुटा दूँ अपनी साड़ी ज़िन्दगी मगर दोस्ती पर तो मेरे इश्क भी कुर्बान है
क्यों धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं जीने निकले थे ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को धीरे धीरे खो रहा हूं मैं यूं तो कमी ...
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