Saturday, February 25, 2012

भृष्टाचार

जी हाँ भृष्टाचार आज मकड़ी के जाल की तरह हमारे देश में फैलता जा रहा है आपको भृष्टाचार हर जगह देखने की मिल जाएगा इससे कोई विभाग अछूता नहीं रहा सभी जगह ये अपनी जड़े जमाये बैठा है और इन्तजार करता रहता है की कोई आये और मेरे इस जाल में फंस जाये अगर आपको किसी सरकारी दफ्तर में कुछ कार्य है और आप वंहा जाते है तो आपको महीनो टहलाया जाता है अगर आप रिश्वत देते है तो आपका वही कार्य एक घंटे में कर दिया जाता है जिसके लिए आप महीनो से टहल रहे है अगर किसी की तबियत खराब होती है और वह सरकारी अस्पताल में जता है तो उसका अच्छी प्रकार से उपचार नहीं किया जता है और ऊपर से दो चार दवाएं बहार से लिख दी जाती है अगर आप डॉक्टर को कुछ पैसे देदे तो सभी दवाएं अस्पताल में स्वतः उपलबध्त हो जाती है इसी तरह से आज भृष्टाचार सभी जगह अपनी जड़े जमाये बैठा है इसके लिए कोई भी व्यक्ति जल्दी आवाज नहीं उठाता है अगर कोई आवाज उठाता भी है तो अगर कोई उठता भी है तो दूसरा कहता है की छोड़ यार तुम अकेले क्या कर पाओगे लेकिन वह यह भूल जाता है की वह इसका विरोध ना कर के उनको बढ़ावा दे रहा है एक तरह इसका मतलब यह है की वह भृष्टाचार को बढ़ावा देने में वह उनका सहयोग कर रहा है

Thursday, February 16, 2012

बढ़ रहा है पोर्नोग्राफी का शौक



जी हाँ अश्लील विडिओ देखना हमारे देश में आम बात हो गयी है हाल ही में कर्नाटक के तीन मंत्रियो ने विधान सभा में पोर्न फिल्म देखकर यह साबित कर दिया की यह एक आम बात है पोर्नोग्राफी का यह कीड़ा ज्यादातर लोगो के सिर पर रेंगना शुरू हो गया है इन्टरनेट पर लोगो देखने के लिए पोर्न साईटे भी बनायीं गयी है पर इन पोर्न साईटों का बुरा असर सीधा हमारे देश के बच्चो के ऊपर अवश्य पडेगा क्योंकि नेट में ये चीजे पग पग में उपलब्ध है और  इन पोर्न साईटों का बच्चो के उअपर कैसा प्रभाव पडेगा आप  लोग  समझ  सकते  है मेरा मानना है की इन पोर्न साईटों तुरंत पाबन्दी लगा देनी चाहिए यही  हमारे देश और बच्चो दिनी के हित में होगा अन्यथा बच्चो के साथ  साथ हमारे देश की संस्कृति पर भी बुरा प्रभाव पडेगा खैर अभी तो भारत विश्व में इस तरह के विडिओ देखने वालो की सूचि में चौथे   पायदान पर है  

धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....

क्यों धीरे धीरे खुद को   खो रहा हूं मैं  जीने निकले थे  ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को  धीरे धीरे खो रहा हूं मैं  यूं तो कमी ...