Thursday, March 10, 2011

खुशियाँ हमको लूट गयीं...

खुशियाँ हमको लूट गयीं
किया था वादा साथ चलने का
सपने दिखा कर वो सपने तोड़ गयी
खुशिया हमको लूट गयी
जब हुआ सामना रहो में कठिनाइयों से
जब चुभने लगे राहों में काटें
तब वो हमको छोड़ गयीं
खुशियाँ हमको लूट गयीं
हम दोनों ने तो किया था वादा साथ चलने का
मै तो अपने वादे पर अब भी कायम हूँ
वो देख कर मुसीबतों को राहों में
हमको छोड़ गयीं, खुशियाँ हमको लूट गयीं...

Thursday, March 3, 2011

बस अब नहीं...



भृष्टाचार आज के समय में एक बड़ी समस्या बन कर रह गया है ! आखिर क्योँ  नहीं ख़त्म  हो रहा भृष्टाचार क्योकि आप और हम खुद नहीं चाहते की भृष्टाचार ख़त्म हो, बस बहुत हुआ अब पहल करनी पड़ेगी ! अब मै शांत नहीं रह सकता आखिर क्यूँ सर्कार बड़े-बड़े दावे करती है ? क्यूँ नहीं उठती कोई ठोस कदम, सर्कार के द्वरा उठाये गए कदम आप भी जानते है और मै भी ! क्यों नहीं लती सर्कार कला धन वापस ? कोई नहीं करती कोई ठोस कार्यवाई ? अब हामी लोगों को कु६ करना पड़ेगा, भारत लुट रहा है और हम देख रहे है !  हम भारत को लुटते नहीं देख सकते, भारत की जनता को एकत्र होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, लेकिन यहाँ तो आवाज उठाने की बात दूर रही, लोग इसके बारे में सोंचते तक नहीं ! वे कहते है भला हम कैसे लड़ सकते है, वो ये भूल जाते है की हमारे देश के शहीद अगर ऐसा ही सोंचते तो आज तक हम आजाद ही न हुए  होते.........................      

धीरे धीरे खुद को खो रहा हूं मैं ....

क्यों धीरे धीरे खुद को   खो रहा हूं मैं  जीने निकले थे  ज़िन्दगी को , अब उसी ज़िन्दगी को  धीरे धीरे खो रहा हूं मैं  यूं तो कमी ...